वर्षों से बढ़ता कूड़ा और स्वास्थ्य पर प्रभाव
दिल्ली में तीन साल से कूड़ा जमा हो रहा था, जिससे लैंडफिल साइट लगातार बढ़ती जा रही थी। सबसे पहले, इस कूड़े के पहाड़ों के कारण कई इलाकों में प्रदूषण और बदबू फैल गई थी।
इसके अलावा, आसपास के लोगों को साँस लेने में तकलीफ और एलर्जी जैसी समस्याएं हो रही थीं।
साथ ही, मिट्टी और पानी में विषाक्त तत्वों के मिल जाने से स्थानीय स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ गए थे।

अब शुरू हुई लैंडफिल सफाई की प्रक्रिया
इसके बावजूद, सरकारी अधिकारियों और नगर निगम ने मिलकर कार्ययोजना बनाई है। इसके तहत पुराने कूड़े को हटाने के साथ-साथ नई सफाई व्यवस्था पर भी काम चल रहा है।
उदाहरण के लिए, विशेषज्ञों ने बताया कि फिलहाल विभिन्न उपकरणों और मशीनों से कूड़ा हटाया जा रहा है और उसे सुरक्षित तरीके से निस्तारित किया जा रहा है।
इसके साथ ही, मिट्टी की गुणवत्ता की जांच भी हो रही है ताकि उस पर पुनः हरियाली लायी जा सके।
नागरिकों को मिल रही अपील और सुझाव
यही कारण है कि स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से आवश्कतानुसार कूड़ा कम करने और समय पर कूड़ा डिस्पोज़ल की अपील की है।
इसलिए, लोग अब प्लास्टिक और जैविक कूड़ा अलग कर रहे हैं, ताकि रीसाइक्लिंग और कम्पोस्टिंग के माध्यम से कूड़ा कम हो सके।
साथ ही, सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है और उन्हें सुरक्षा गियर उपलब्ध कराया गया है।
इस प्रकार, लैंडफिल साइट का पुनः उपयोग किया जा सकेगा और आवासीय इलाकों में प्रदूषण कम होगा।
निष्कर्ष: दिल्ली को स्वच्छ बनाने की राह में एक कदम
इसलिए, तीन साल में चल रही यह लैंडफिल सफाई दिल्ली के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी।
क्योंकि, कूड़े के पहाड़ हटने से न केवल पर्यावरण शुद्ध होगा बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा।
अंततः, यदि हम सब जागरूक होकर सहयोग करें और साफ-सफाई बनाए रखें, तो ये सफाई अभियान सफल होकर दिल्ली को फिर से स्वच्छ और खूबसूरत बना सकता है।
