हमला क्यों किया गया?
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आत्मघाती हमले में 26 श्रद्धालुओं की जान चली गई। इस हमले की जिम्मेदारी एक पाकिस्तानी समर्थित आतंकी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी। यह हमला ना सिर्फ मानवता के खिलाफ था, बल्कि भारत की सुरक्षा नीति को भी खुली चुनौती थी।
हमले में मासूम नागरिकों को निशाना बनाया गया, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, जिससे देशभर में गुस्से की लहर दौड़ गई।
भारत ने इस हमले को राष्ट्र की अस्मिता पर हमला मानते हुए जवाब देने की ठानी।
ऑपरेशन सिंदूर की योजना और कार्रवाई
6 मई की सुबह 4:15 बजे भारतीय वायुसेना ने “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया। राफेल और सुखोई फाइटर जेट्स ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और बहावलपुर, सियालकोट जैसे इलाकों में मौजूद 9 आतंकवादी ठिकानों पर बमबारी की। यह हमला केवल 23 मिनट में पूरा हो गया, लेकिन इसका प्रभाव दूरगामी रहा।
इसके अलावा, भारतीय सेना ने स्पष्ट किया कि यह एक “प्रीसिशन स्ट्राइक” थी, जिसमें किसी आम नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचाया गया।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
हालांकि पाकिस्तान ने इस हमले को “आक्रामक कार्रवाई” बताया और 5 भारतीय विमानों को मार गिराने का दावा किया, पर भारत ने इसे खारिज कर दिया। इसके साथ ही पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में आपत्ति दर्ज करवाई और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
इस बीच, अमेरिका, रूस और चीन ने भारत-पाक तनाव पर चिंता जताई और दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की।
इसलिए, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शांति वार्ता की पेशकश भी की है।

निष्कर्ष: भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति स्पष्ट
ऑपरेशन सिंदूर ने एक बार फिर दिखा दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरतेगा।
इस तरह, यह कार्रवाई सिर्फ एक जवाब नहीं थी, बल्कि एक संदेश था – कि भारत अपनी सीमाओं और नागरिकों की रक्षा के लिए हर कदम उठाने को तैयार है।